Bhole baba ke dwar gai | bhole bhajan 


Bhole baba ke dwar gai


Bhole baba ke dwar gai 

bhole baba ke dwar gai, jo mangi sab paa gai,
me to gai thi shiv darshan ko, bum bhole shiv ki pujan ko,
mujhpe unki daya ho gai, jo maangi sab paa gai।
vinti karu bhole bandari, aai sharan me aaj tumhari,
me to jeevan se ghabra gai, jo maangi sab paa gai।
sab devo me dev nirale, pahne rehte hai mrug ki chhale,
mere dukh ki ghadi tal gai, jo maangi sab paa gai।
bhid lagi hai tumhare dware, log khade hai haath pasaare,
ek kshan bhi na der bhai, jo mangi sab paa gai।

भोले बाबा के द्वार गई, जो मांगी सब पा गई,
में तो गई थी शिव दर्शन को, बूम भोले शिव की पूजन को,
मुझपे उनकी दया हो गई, जो मांगी सब पा गई।
विनती करू भोले भण्डारी, आई शरण में आज तुम्हारी,
में तो जीवन से घबरा गई, जो मांगी सब पा गई।
सब देवो में देव निराले, पहने रहते है मृग की छाले,
मेरे दुःख की घडी टल गई, जो मांगी सब पा गई।
भीड़ लगी है तुम्हारे द्वारे, लोग खड़े है हाथ पसारे,

एक क्षण भी न देर भई, जो मांगी सब पा गई।
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